इच्छाधारी नागिन की जादुई कहानी | Nagin story | Hindi Kahaniya | Stories in Hindi | Hindi Moral Story

इच्छाधारी नागिन की जादुई कहानी | Nagin story 

जामपुर गाँव में एक शंकर भगवान् का मंदिर था जो कई सालों पुराना था। जब कभी भी गाँव पर कोई परेशानी  आती उस मंदिर से एक रौशनी चारों तरफ फ़ैल जाती और रौशनी इतनी तेज़ होती कि कोई भी उस रौशनी के सामने टिक नहीं पाता था। एक दिन वहाँ एक मुसाफिर आया उसका नाम मोहन था।

मोहन: अरे भैया सुनो मुझे टीकमपुर के लिए जाना है लेकिन रात बहुत हो गई है तो क्या मैं यहाँ रुक सकता हूँ?

भैया: आप जाकर एक बार सरपंच साहब से मिल लीजिये वही आपको यहाँ रुकने की आज्ञा दे सकते हैं।

मोहन: अच्छा ठीक है।

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मोहन वहाँ से सरपंच के पास निकल जाता है और सरपंच के पास जाकर कहता है…..

मोहन: सरपंच साहब मुझे कल सुबह तक के लिए यहाँ रुकना है। मुझे टीकमपुर जाना है लेकिन रात बहुत हो गई है तो मैं इस समय नहीं जा सकता।

सरपंच: कोई बात नहीं आप हमारे गाँव में रुक सकते हैं।

मोहन: आपका धन्यवाद।

सरपंच मोहन को अपने ही घर में रोक लेता है और मोहन का बहुत आदर सम्मान करता है। लेकिन रात को मोहन सोता नहीं है मंदिर की तरफ जाता है। और सरपंच उसे मंदिर की तरफ जाते हुए देख लेता है। सरपंच भी मोहन के पीछे जाता है।

सरपंच: क्या बात है मोहन आप इतनी रात को मंदिर के पास क्यों घूम रहे हो?

मोहन: मुझे यहाँ से कुछ आवाज और रौशनी दिखाई दी थी। इसलिए मैं यहाँ आया।

सरपंच: ये हमारे गाँव का सबसे पुराना मंदिर है जब भी गाँव पर कोई मुसीबत आती है तो ये मंदिर हमारी रक्षा करता है।

मोहन: यहाँ कोई नागिन है क्या?

सरपंच: आपको कैसे पता?

मोहन: मुझे ऐसा लगा जैसे यहाँ कोई नागिन है।

सरपंच: कौन हो तुम?

मोहन: मैं मोहन हूँ।

सरपंच: तुम कोई और हो तब ही तुमको ये पता चला कि यहाँ पर कोई नागिन है।

सरपंच की आवाज सुनकर और भी लोग आ जाते हैं…..

लोग: क्या हुआ सरपंच जी?

सरपंच: इसे हमने मेहमान समझ कर अपने घर और गाँव में रखा, लेकिन ये कोई साधारण इन्सान नहीं है इसे पता है यहाँ नागिन है।

मोहन: मैं सपेरा हूँ और मैं इस नागिन की तलाश में ही आया हूँ। मुझे किसी भी तरह ये इच्छाधारी नागिन चाहिए।

सरपंच: इस इच्छाधारी नागिन को तुम यहाँ से नहीं ले जा सकते।

इतने में इच्छाधारी नागिन सामने आती है….

इच्छाधारी नागिन: क्यों आये हो तुम यहाँ?

मोहन: मैं तुमको लेने  के लिए आया हूँ चलो मेरे साथ।

इच्छाधारी नागिन: मोहन में तुम्हारे साथ नहीं जाउंगी और सालों से मैं यहाँ हूँ और मैं यहाँ से नहीं जा सकती।

मोहन: अगर तुम मेरे साथ नहीं चलोगी तो मैं ये पूरा गाँव बर्बाद कर दूँगा।

इतना कहते ही तेज़ हवा चलने लगती है लोगों के घर टूटने लगते हैं।

इच्छाधारी नागिन: मत करो ऐसा तुम।

मोहन: मैं ऐसा करना नहीं चाहता था लेकिन तुम मेरी बात नहीं सुन रही हो।

इच्छाधारी नागिन: मैं यहाँ से नहीं जा सकती अगर मैं यहाँ से गई तो मेरी मृत्यु हो जाएगी।

मोहन: और अगर तुम मेरे साथ नहीं गई तो तुम्हारे बचपन का गाँव बर्बाद हो जायेगा। उस पर संकट है।

इच्छाधारी नागिन: क्या संकट?

मोहन: वहाँ एक अघोरी ने अपना डेरा डाल लिया है और वह लोगों को बहुत परेशान करता है। अगर तुम नहीं आई तो वो सबको मार डालेगा। सिर्फ तुम  ही उससे लड़ सकती हो वो शक्ति मेरे पास भी नहीं है जो तुम्हारे पास है ।

सरपंच: इच्छाधारी नागिन तुम यहाँ से ही कुछ ऐसा करो कि उस अघोरी को सबक मिले।

इच्छाधारी नागिन मंदिर में जाती है और वहाँ से चार पत्थर उठाती है और उस पर अपने विश को डालती है उसे मोहन को देती है और कहती है कि इस पत्थर को अघोरी के उस कमण्डल के पास रख देना जिससे वह लोगों को शराब पिलाता है। अगर अधोरी के इरादे गलत होंगे तो उसकी श्री शक्तियाँ चली जाएँगी.

मोहन वो पत्थर लेकर चला जाता है और जैसा इच्छाधारी नागिन ने बोला होता है  वैसा ही करता है.

मोहन: अधोरी तुम लोगों को शराब पिलाना बंद करो इससे गाँव के लोगों की मौत हो रही है.

अधोरी: तुम कौन होते हो मेरे बीच में बोलने वाले में ऐसा ही करता रहूँगा.

ऐसा बोलते ही….

अधोरी: ये मुझे क्या हो रहा हैं कोई मुझे बचाओ मेरी शक्तियाँ ख़त्म हो रही हैं मैं कुछ भी नहीं कर पा रहा हूँ.

और अघोरी को लकवा हो जाता है और उसका शरीर नीला पड़ने लगता है वह जमीन पर गिर जाता है…..

अघोरी: बचाओ ….. बचाओ ….

मोहन: अधोरी अब तुम साधारण इंसान हो और अब तुम हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकते। तुम्हारी एक गलती ने तुम्हारी सारी शक्तियाँ ख़त्म कर दी.

इतने में नागिन की छाया सबको दिखाई देती है…

इच्छाधारी नागिन: ये तुम्हारे कर्मों का फल है मोहन ने तुमको पहले ही समझाया था…

अघोरी: मैंने अपने पैर पर खुद ही कुल्हाड़ी मार दी. नागिन मुझे माफ़ कर दो मुझे बचा लो और मेरी शक्तियाँ मुझे वापस कर दो.

नागिन: मैं तुम्हारी जान बचा सकती लेकिन तुम्हारी शक्तियाँ तुमको वापस नहीं दे सकती. जो होना था हो गया अब तुम फिर से तपस्या करो और फिर तुम्हें तुम्हारी शक्ति वापस मिलेगी.

अघोरी को ऐसा सुनकर अपनी गलती का अहसास होता है वो सबसे माफ़ी मांगता है और इच्छाधारी नागिन से भी माफ़ी मांगता है। ऐसे इच्छाधारी नागिन दो गाँव की रक्षा करती है। और तपस्या करने लगता हैं.

मोरल ऑफ़ द स्टोरी:

कभी किसी का बुरा नहीं करना चाहिए। अगर आप किसी का बुरा करते हो तो आपका बुरा होता है जैसे अघोरी का हुआ।

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