बच्ची बनी चुड़ैल || Chudail Ki Kahani || Hindi Moral Story || Hindi Kahaniya || Kahani Chudail Ki

एक पुराने शहर में आज भी लोग बहुत थे लेकिन उसी शहर में एक घर था जहाँ पर कोई नहीं रहता था। कहा जाता है के उस घर में एक चुड़ैल रहती है। लेकिन आज उस घर में एक परिवार रहने आया था। उस परिवार में तीन लोग थे राजेश, सुनीता और स्वीटी। शायद इनको भी नहीं मालूम था इस घर के बारे में।

 

राजेश – देखा कितना सस्ता और कितना बड़ा घर मिला है। बताओ इस भीड़ भाड़ वाले इलाके में कोई देता है इतने सस्ते में घर?

सुनीता – सच्ची!! हमने कभी ना सोचा था के आप इत्ता बड़ा घर तलाश रहे है। हमको तो लगा था मानो कोई छोटा मोटा घर ढून्ढ रहे होंगे।

राजेश – हां हा हा हा तुम भी न बस, अरे तुमको भी तो मैंने ही ढूंढा है।

सुनीता (शरमाते हुए) – अजी, बस भी करो।

स्वीटी – ओर मुझे किसने ढूंढा पापा??

राजेश – आपको आपके पापा और मम्मा दोनों ने! हा हा हा

स्वीटी – मुआअह आप मेरे बैस्ट पापा हो।

राजेश – अच्छा सुनीता

सुनीता – जी कहिये

राजेश – अब घर इतना बड़ा है तो तुमको नहीं लगता, परिवार थोड़ा?

सुनीता – आप भी न!!

 

हर किसी मध्यम वर्ग के परिवार की तरह इस परिवार की भी खुशियाँ छोटी छोटी बातों में मिल जाया करती थी। लेकिन शायद उस घर के पंखे पर बैठी उस चुड़ैल को वह सब अच्छा नहीं लग रहा था।

 

चुड़ैल – हा हा हा हा पागल इंसानो आज रात के बाद ये खुशियाँ तुमको नहीं मिलने वाली हा हा हा हा हा हा

 

ऐसा कहते ही चुड़ैल स्वीटी के शरीर में चली जाती है और कुछ देर बाद स्वीटी के चिल्लाने की आवाज़ आती है।

राजेश – स्वीटी! स्वीटी! कहाँ है मेरी बच्ची??

सुनीता (डरी और परेशान) – स्वीटी स्वीटी क क कहाँ हो तुम?

स्वीटी (रोते हुए) – पापा —– पापा मुझे बचा लो मुझे यहाँ बहुत डर लग रहा है।

कुछ देर बाद राजेश को समझ आता है के आवाज़ पास रखी अलमारी से आ रही होती है। जैसे ही राजेश अलमारी का दरवाज़ा खोलता है।

 

राजेश – स्वीटी मेरी बच्ची। तुमने तो हमको डरा ही दिया था।

स्वीटी (नींद में)- पापा गुड नाईट।

सुनीता (थोड़ा गुस्से में )- इसने तो सच में डरा ही दिया था। एक तो नया घर ऊपर से ये।

राजेश – अरे! आज थक भी तो बहुत गए। हो सकता है नींद में चली हो! चलो अब सो जाओ तुम भी।

 

लेकिन कुछ देर बाद स्वीटी उठ जाती है और घर में चलना शुरू कर देती है।

 

अगले दिन जब राजेश और सुनीता उठते है तो देखते है के उनका सारा राशन फर्श पर गिरा होता है।

सुनीता – इस स्वीटी ने तो दिमाग ख़राब कर दिया। बताओ ये क्या इसने रात में

राजेश – अरे बस करो। मैं बाजार से जा कर सब ले आता हूँ तुम अब इसको मत डांटना।

 

रात हो जाती है और सभी लोग सो जाते है।

चुड़ैल – हा हा हा कल तो शकल देखने वाली थी इनकी अभी तो शुरुआत है। आज दिखती हूँ तुमको के मैं कौन हूँ हा हा हा हा

 

ऐसा कहते ही चुड़ैल सुनीता के शरीर में चली जाती है।

सुनीता – राजेश राजेश मुझे बचाओ। मुझे बहुत डर लग रहा है।

राजेश – सुनीता! कहाँ हो तुम?

 

ऐसा कहते ही राजेश अलमारी का दरवाज़ा खोलता है लेकिन वहाँ पर कोई भी नहीं होता। राजेश परेशान हो जाता है के ऐसा क्यों हो रहा है।

 

जैसे ही राजेश बेड के नीचे देखता है। सुनीता उस बेड के नीचे सोई होती है। राजेश सुनीता को बेड पर लिटा देता है और सारी रात अपनी बच्ची को देखता रहता है। उसको लगता है के अगर वो अब सो गया तो ना जाने उसको आगे क्या देखने को मिले।

 

अगली सुबह।

राजेश – सुनीता में ज़रा बाजार से सामान ले कर आता हूँ।

सुनीता – जी अच्छा।

राजेश – क्या हुआ? तबियत ठीक है तुम्हारी?

सुनीता – पता नहीं रात से पूरे शरीर में दर्द हो रहा है।

स्वीटी – पापा मुझे भी परसो रात से पूरे शरीर में दर्द हो रहा है।

 

राजेश ये सब सुन कर बहुत परेशान हो जाता है और उस रात वह पूरी रात वह जाग कर निकलता है। अगले दिन वह काम पर जाता है तो उसका दोस्त सलीम उसको पूछता है।

 

सलीम – क्या बात है राजेश? लगता है जैसे तेरी नींद पूरी नहीं हुई। क्या बात है दोस्त?

राजेश – क्या बताऊ सलीम भाई।

 

ऐसा कहते ही राजेश की आँखों में आंसू आ जाते है और वह सारी कहानी सलीम को बताता है।

 

सलीम – एक काम कर मुझे अपने घर ले चल।

राजेश सलीम को अपने घर ले कर जाता है।  सलीम जैसे ही उसके घर में प्रवेश करता है। अचानक तेज़ हवा चलना शुरू हो जाती है और सारे घर का सामान गिरना शुरू हो जाता है।

 

राजेश – सलीम ये क्या हो रहा है?

सलीम – फ़िक्र मत करो मैं हूँ न

 

कुछ देर बाद एक आवाज़ आती है।

 

चुड़ैल – क्यों आये हो तुम यहाँ?

सलीम  – अपने भाई की मदद करने

चुड़ैल – ये घर मेरा है। बरसो से में इस घर में रह रही हूँ। और कोई नहीं आ सकता यहाँ पर।

सलीम – अच्छा ठीक है। तुमको कौन माना कर रहा है। लेकिन तुम अकेले इतने बड़े घर में।

चुड़ैल – हाँ क्योकि मैंने इसी घर में जान दी थी। वो जो दिवार देख रहे हो। उसके पीछे रहती हूँ मैं।

 

ऐसा कहते ही सलीम राजेश को बोल कर उस दिवार को तुड़वा देता है। उस दिवार में एक पिंजर मिलता है।

सलीम और राजेश उस पिंजर को एक जंगल में जा कर जला देते है। उस दिन के बाद उस घर से उस चुड़ैल का साया हमेशा के लिए चला जाता है।

और कुछ दिन बाद स्वीटी के एक भाई का जन्म होता है।

 

और  पूरा परिवार अब ख़ुशी ख़ुशी रहता है। लेकिन एक रात।

चुड़ैल – चुड़ैल हा हा हा हा तुमको क्या लगा में चली गई । ये अभी सो रहे है। सोने दो बेचारों को | मैँ फिर से आउंगी और जो मेरे रास्ते में आएगा उसको परेशान करुँगी। इस चैनल को सब्सक्राइब जरूर करना और नीचे कमेंट में बताना कैसी लगी ये कहानी हा हा हा हां

 

फिर मिलते है हा हा हा हा हा हा

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