रक्षाबन्धन अमीर vs गरीब || Amir Vs Garib Rakshabandhan || Emotional Hindi Story || Moral Kahani

एक बार की बात है एक पुराने शहर में सुमन अपनी बेटी के साथ रहती थी । वह अपनी बेटी करिश्मा के साथ घर का झाड़ू और बर्तन करके अपना गुजरा कर रही थी। पति के देहांत के बाद घर के हालत ठीक ना होने के वजह से वह अपनी बेटी को भी अपने साथ ले जाया करती थी।

करिश्मा- आन्टी आप कैसे हो?

आन्टी – मैं मुझे क्या हुआ है मैं तो ठीक ही हूँ। अरे करिश्मा ये राखी क्यों हाथ मे पकड़ रखी है

करिश्मा- अरे आन्टी मेरा कोई भाई नही है तो

आन्टी – तो, तो क्या ?

सुमन  – तो मै सुमित भईया को राखी …

आन्टी –  हम्म, ये अच्छा तरीका है। राखी बांध कर महंगे महंगे गिफ्ट और पैसे एठने का। अगर तुम दोनो को पैसे और गिफ्ट चाहिए ही थे तो सीधे ही माँग लेते ऐसे दिखावा करने की क्या जरुरत थी। अब खड़े खड़े मेरा मुँह देखना है या घर का काम भी करना है आई बड़ी राखी बांधने, हूम्म

सुमन – करिश्मा, हम अजय भईया को राखी नही बांधेंगे चल छोड़ हम गरीब है शायद इसलिए

करिश्मा- तो क्या हम ये अपनी राखी किसी को नहीं बांधेंगे

सुमन – अरे नहीं नही, हम हमारे पड़ोस वाले दीपक भैया को राखी बांधेंगे वो वैसे भी बहुत अच्छा है। वो हमे राखी बांधने के लिए मना नही करेगा।

करिश्मा- हाँ आप जल्दी से काम कर लो फिर हम चलते है।

सुमन  – हाँ, चल

कुछ देर बाद करिश्मा मेमसाहब की बेटी से पूछती है

करिश्मा- तुम चॉकलेट खायेगी

काव्या- हाँ, दीदी मैं चॉकलेट खाऊँगी

करिश्मा – तो ये ले

आन्टी- अरे अरे, बेटा ऐसे सस्ती वाली चॉकलेट नही खाते जाओ अन्दर जाओ

काव्या- ओके मम्मा

मेमसाहब का ऐसा रवैया देख कर करिश्मा को बहुत बुरा लगता है। लेकिन वह अपनी गरीबी का एहसास करते हुए इस बात को भुला देती है और अपना काम करने लग जाती है।

कुछ देर बाद मेमसाहब का पति ऑफिस जाने के लिए आ जाता है और

आन्टी (अपने पति से)- सुनिये, ये मिठाई के बोक्स कितने के हैं

मेमसाहब का पति बताता है के हर एक बॉक्स की कीमत पांच सौ रुपये की है

आन्टी – क्या आप भी, आपको पता हैं ना कि हम ऐसे सस्ती मिठाईयों को हाथ भी नही लगाते तो फिर ऐसी मिठाईयाँ क्यों उठा के लाये अब्ब मैं इसको फेक दूँगी

 

करिश्मा- आन्टी आप इस मिठाई को मत फेंकना मुझे मिठाई बहुत पसन्द है मैं खा लूँगी

आन्टी – हाँ हाँ अगर एक रुपये की चॉकलेट हाथ मे हो तो 500 रुपये की मिठाई पसन्द होगी ही ना

 

कुछ देर बाद मेमसाहब की लड़की करिश्मा की राखी हुई राखी देखती है और खुश होती है लेकिन उसी समय वह पर मेमसाहब आ जाती है और गुस्से से कहती है

 

आन्टी – अरे बेटा ये सस्ती वाली राखी लेकर क्यों घूम रहे हो आप तो सूरज को चाँदी वाली राखी बाँधोंगे ये सस्ती वाली नहीं। चलो रखो

 

आन्टी – अच्छा सुमन  

सुमन – जी मेम साहब

आन्टी – ये राखी कितने की हैं

सुमन – 15 रुपये का पूरा पैकेट आया जिसमे 3 राखी है

आन्टी – यानी 5 रुपये की एक राखी, है ना इतनी सस्ती राखी हम्म्म चलो ठीक है

ये देखो मेरे बेटे के लिए ये महंगे गिफ्ट्स जब मेरी बेटी ये गिफ्ट्स देखेगी तो बहुत खुश हो जाएगी हूम्म

 

 

उसी समय वह से सुमन गुज़र रही होती है और गलती से गिफ्ट पर पानी गिर जाता है

आन्टी (गुस्से से) – ये क्या कर दिया, ये सारे टोएज मैं अपेक्षा को गिफ्ट देने के लिए लाई थी, देख कर नही चल सकती थी क्या सारे टोएज पर पानी फेर दिया

सुमन – मेम साहब मुझे माफ कर दिजिये, ये मैने जानबूच कर नही किया

आन्टी- अच्छा तू कहना चाह रही है कि मैं तूझसे जानबूचकर टकराई हैं ना।

सुमन – नही नही मेम साहब

आन्टी-  कितने मँहगे टोएज हैं कभी देखे भी नही होंगे, हूम्म।

अचानक मेमसाहब का फ़ोन आता है और उसके पति दुखी हो कर बता रहे होते है के

हमारी कम्पनी को बहुत बड़ा नुकसान हूआ है और इसलिए अब वो हमेशा के लिए बंद हो जायेगी

और हमे इस नुकसान की भरपाई के लिए हमारा ये घर गाड़ी और तुम्हारी सारी ज्वैलरी बेचनी होंगी और अगर इसे भी भरपाई ना हूई तो हमे हमारी गाँव की सारी प्रोपट्री भी बेचनी होगी अब हम ज्लदी से यहाँ से निकलते हैं तू बैग पैक कर

आन्टी – पर हम कहाँ जायेंगे?

वह बताते है के अब्ब हमको किराये के किसी झोपड़े में रहना पड़ेगा और शायद पेट पालने के लिए मज़दूरी करनी पड़ेगी

आन्टी – क्या?

यह सुन का मेमसाहब को चक्कर आ जाता है और वह गिर जाती है

सुमन मेम साहब को उठाती है और मेमसाहब रोते हुए अपना सारा दर्द सुमन को बता देती है

 

सुमन – मेम साहब मैं आपकी ज्यादा मदद तो नही कर सकती लेकिन ये कुछ पैसे हैं ये आप अपने पास रखीये ज्यादा नही तो अपेक्षा को कुछ खिलाने पीलाने मे काम आयेंगे

आन्टी – अरे पर

सुमन – नहीं आप मना मत कीजिये लीजिये

 

 

आन्टी( दुखी होते हुए)- मैं कितनी बुरी हूँ पैसो के घमण्ड मे मैं अन्धी हो गयी और तुम्हारी अच्छाई को मैं देख भी ना पाई सुमन  मैं तुम्हारा बहुत अपमान किया तुम्हे बहुत नीचा दिखाया प्लीज मुझे माफ कर दो।

सुमन – अरे नहीं नहीं मेमे साहब, आप माफी मत माँगीये

आन्टी – अच्छा तो ठीक हैं तुम्हे इनको राखी बाँधनी थी तो बाँध लो और करिश्मा को भी बुला लो फिर हम चलें जायेंगे इसलिए

यह सब के चलते मेमसाहब के पति वह पर आ जाते है और मेमसाहब को रुकने के लिए बोलते है

ऑन्टी – क्या हुआ ?

मेमसाहब के पति बताते है के ये सब झूट था क्योकि तुम अपने घमण्ड मे आकर हर किसी को नीचा दिखा रही थी इसलिए तुम्हारे घमण्ड को तोड़ने के लिए मैंने तुम से झूठ बोला हमारी कम्पनी को  कोई नुकसान नही हुआ और हम कही नही जा रहे


आन्टी – आप ने जो भी किया बिल्कुल सही किया मुझे मेरी गलती का ऐहसास हो गया हैं

करिश्मा- तो अब चले राखी बाँधने

सभी खुश होते हैं

त्योहारों में गिफ्ट्स से ज्यादा फीलिंग्स की कदर होनी चाहिए क्योकि जरूरी नहीं है के महंगा गिफ्ट ही फीलिंग्स दिखता है

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