Shikanji ki kahani | Short motivational hindi story

Short Motivational Story in hindi | शिकंजी कहानी

दोस्तो, आज हम इस पोस्ट में एक लघु प्रेरणादायक कहानी शिकंजी का स्वाद आप के साथ साझा करगें। यह कहानी जीवन में आपके साथ हुये बुरे अनुभवो को भुलाकर आगे बढ़ने की शिक्षा देती हैं तो आइये पढ़ते हैं

एक बार कि बात है एक प्रोफेसर क्लास ले रहे थे। क्लास के सभी छात्र बड़ी ही रुचि से उनके लेक्चर को सुन रहे थे और वो जो सवाल पूछ रहे थे उनका जवाब दे रहे थे। लेकिन उन छात्रो के बीच एक ऐसा भी छात्र था जो चुपचाप और गुमसुम बैठा हुआ था।

प्रोफेसर ने कक्षा के पहले दिन ही उस विद्यार्थी को भाप लिया था लेकिन कुछ नही बोले परन्तु जब चार से पाँच दिन तक ऐसा ही चला तो उन्होंने उस छात्र को कक्षा के बाद अपने ऑफिस में बुलाया और पूछा

प्रोफेसर- तुम हर समय उदास रहते हो कक्षा में अकेले और चुपचाप बैठे रहते हो लेक्चर पर भी ध्यान नही देते क्या बात है कोई परेशानी हैं

लड़का- सर वो (लड़का कुछ हिचकिचाते हुए बोला) मेरे अतीत में कुछ ऐसा हुआ है जिसकी वजह से मैं परेशान रहता हूँ समझ नही आता क्या करुँ

प्रोफेसर बहुत ही भले आदमी थे उन्होने उस छात्र को शाम को अपने घर बुलाया

जब शाम को छात्र प्रोफेसर के घऱ गया तो प्रोफेसर ने अंदर बुलाकर बैठाया। फिर स्वयं किचन में गये और शिकंजी बनाने लगे। उन्होने जानकर शिकंजी में नमक ज्यादा डाल दिया।

फिर किचन से आकर उन्होने शिकंजी का गिलास छात्र को दिया

प्रोफेसर- ये लो, शिकंजी पियो।

छात्र ने गिलास हाथ में लेकर जैसे ही एक घूंट पिया ज्यादा नमक के स्वाद की वजह से उसका मुँह अजीब सा बन गया यह देख कर प्रोफेसर ने पूछा

प्रोफेसर- क्या हुआ शिकंजी अच्छी नही लगी

छात्र- नही सर ऐसी बात नही हैं बस शिकंजी में नमक थोड़ा ज्यादा है।

प्रोफेसर- अरे अब तो ये शिंकजी बेकार हो गयी। लाओ गिलास मुझे दो मैं इसे फेंक देता हूँ

प्रोफेसर ने छात्र से गिलास लेने के लिये हाथ बढ़ाया लेकिन छात्र ने मना करते हुये कहा

छात्र- नही सर, बस नमक थोड़ा सा ही ज्यादा है थोड़ी चीनी और मिलायेंगे तो स्वाद अच्छा हो जायेगा

यह बात सुन कर प्रोफेसर गंभीर हो गये और बोले

प्रोफेसर- सही कहा तुमने अब इस बात को समझ भी लो ये शिंकजी तुम्हारा जीवन है इसमें घुला अधिक नमक तुम्हारे अतीत के बुरे अनुभव है। जैसे नमक को शिंकजी से बाहर नही निकाल सकते वैसे ही उन बुरे अनुभवो को जिन्दगी से नही निकाला जा सकता है वे बुरे अनुभव तुम्हारे ही जिन्दगी का हिस्सा है लेकिन जिस प्रकार चीनी घोलकर शिकंजी का स्वाद बदल सकते हैं वैसे ही बुरे अनुभवों को भूलने के लिये जिन्दगी में मिठास तो घोलनी ही पड़ेगी ना इसलिये मैं चाहता हूँ कि तुम अब अपने जिन्दगी में मिठास घोलो।

प्रोफेसर की बात छात्र की समझ मे आ गयी और उसने यह निर्णय लिया कि अब वह बीती बातों से परेशान नही होगा।

शिक्षा(Moral of The Story)

जिन्दगी में अक्सर हम अतीत की बुरी यादों और अनुभवों को याद कर दु:खी होते रहते हैं. इस तरह हम अपने वर्तमान पर ध्यान नहीं दे पाते और कहीं न कहीं अपना भविष्य बिगाड़ लेते हैं. जो हो चुका, उसे सुधारा नहीं जा सकता. लेकिन कम से कम उसे भुलाया तो जा सकता है और उन्हें भुलाने के लिए नई मीठी यादें हमें आज बनानी होगी. जीवन में मीठे और ख़ुशनुमा लम्हों को लाइये, तभी तो जीवन में मिठास आयेगी।

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