Bhootiya Dhaba | भूतिया ढाबा | Haunted Hotel Story | Horror Stories | Chudail Story | Hindi Kahaniya

Bhootiya Dhaba | भूतिया ढाबा | Haunted Hotel Story | Horror Stories | Chudail Story | Hindi Kahaniya

धीरज का परिवार आगरा में रहता था एक दिन धीरज के पापा सुशील घर तो उन्होंने बताया कि अगले महिने पूरे परिवार को भाई की शादी में गाँव जाना हैं। धीरज की मम्मी गाँव जाने से मना करने लगी

सुमन(धीरज की मम्मी)- उस सड़े हुए गाँव में मैं कभी नही जाऊँगी एक तो इतना दूर हैं ऊपर से वह पर लोग भी बहुत काम रहते है और तो वह पर लाइट भी नहीं है ना बाबा न मैं तो ना जाऊ

धीरज के पापा(सुशील) – अब गाँव का एरिया पहले जैसा नही रहा रोड पड़ गया है वहाँ पर मैं अपने दोस्तों से कार माँग लूँगा उसी से चलेंगे

धीरज चलो ना मम्मी बहुत मजा आयेगा वैसे भी कई दिनों से कहीं घुमने नही गयें हैं

सुमन(धीरज की मम्मी)- ठीक हैं चलेंगे लेकिन वहाँ कार से पहुँचने में भी बीस घंटे से ज्यादा का टाइम लगता हैं इसलिये खाना घर से बना कर ले जाना पड़ता हैं खाना तुम्हारे पापा ही बनायेंगे

सुशील(धीरज के पापा)- उसकी जरुरत नही पड़ेगी क्योंकि मैं सुना है कि अब वहाँ सड़क पर कई ढाबे खुल गयें हैं

 

शादी से दो दिन पहले धीरज, सुशील और सुमन कार से गाँव की तरफ निकल पड़े चलते चलते उन्हें  रात हो गयी सड़क पर घोर अँधेरा और साईं साई करता सन्नाटा था

बंदर और हाथी दोनों को उल्लू की बात समझ लगी। दोनों ने फिर एक साथ पूछा, ‘इस प्रतियोगिता में हमको क्या करना होगा?’

उल्लू ने कहा, ‘इस जंगल को पार करने पर एक दूसरा जंगल आता है। जहां पर एक काफी पुराना वृक्ष है, जिस पर एक सोने का सेब लगा हुआ है। तुम दोनों में से उस सोने के सेब को जो पहले लाएगा, उसे ही इस प्रतियोगिता का विजेता बनेगा और शक्तिशाली कहलाएगा।

 

उल्लू की बात सुनते ही बंदर और हाथी बिना कुछ सोचे-समझे दूसरे जंगल की तरफ निकले। बंदर ने अपनी फुर्ती दिखानी शुरू की। वह एक ही छलांग में एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक पहुंच जाता। वहीं, हाथी तेजी से दौड़ने लगा और रास्ते में आने वाली हर चीज को अपने मजबूत शरीर से उखाड़ फेंकता।

धीरज पापा ये रास्ता तो बहुत विरान हैं डर के मारे तो मुझे शू-शू आ रही हैं

ऐसा सुनते ही सुशील कार रोक देता है

धीरज क्या हुआ पापा कार क्यों रोकी

सुशील तुम्ही ने तो कहा तुम्हे शू-शू आ रही हैं जाओ पहले शू-शू करके आओ

धीरज मैं इतने अँधेरे में बाहर नही जाऊँगा

सुशील शू-शू  रोकना अच्छी बात नही होती हम लोग खड़े तो हैं तुम्हारे पास इतना नहीं डरते| जाओ शु शु करके आओ

धीरज ने कार का दरवाजा खोलकर जैसे ही पैर जमीन पर रखा उसका पैर एक हड्डी पर पड़ा धीरज डर के मारे चिल्ला पड़ा

सुशील क्या हुआ

धीरज पापा यहाँ किसी की हड्डी पड़ी हुई हैं

सुमन और सुशील कार से बाहर निकले

सुशील डरने की जरुरत नही हैं शायद कोई जंगली जानवर इसे यहाँ ले आया होगा तुम शू-शू करने जाओ

अचानक धीरज के परिवार को रोड़ पर तीन चार लोग  गुजरते हुए दिखाई दिये तब उसकी जान में जान आई

धीरज चलो आखिर कोई इन्सान इस रोड़ पर दिखाई तो दिया अब मैं भी अराम से शू-शू कर सकता हूँ

 

बंदर ने फिर से फुर्ती दिखाई और वह नदी में कूद गया, लेकिन पानी की लहर काफी तेज थी, तो बंदर नदी में बहने लगा। बंदर को नदी में बहते हुए देखरकर हाथी ने तुंरत अपनी सूंड से उसे पकड़कर पानी के बाहर निकाल दिया।

हाथी के इस व्यवहार को देखकर बंदर काफी हैरान हुआ। उसने हाथी को अपनी जान बचाने के लिए धन्यवाद कहा और अपनी हार मानते हुए हाथी को ही आगे का सफर तय करने के लिए कहा।

 

बंदर की इस बात को सुनकर हाथी ने कहा, ‘मैं नदीं पार कर सकता हूँ। तुम मेरी पीठ पर बैठकर इसे पार कर लो।’

धीरज के मम्मी पापा कार में बैठ गये धीरज जैसे लौटा तो उसने देखा कि कार के पीछे वाली डिक्की हिल रही हैं धीरज ने डिक्की खोली तो उसके अन्दर एक भूतनी लेटी हुई थी धीरज ने धड़ाम से डिक्की बंद कर दी  और चिल्लाने लगा चुड़ैल चुड़ैल चुड़ैल पापा चुड़ैल चुड़ैल चुड़ैल धीरज के मम्मी पापा जल्दी से बाहर निकल कर आयें

सुशील क्या हुआ धीरज?

धीरज पा … पा …पापा डिक्की के अन्दर एक भू.. भू….भूतनी हैं मैंने अभी डिक्की खोलकर देखी थी

सुशील ने डिक्की खोलकर देखने से पहले उन तीन चार लोगों को ढूढा जो कुछ देर पहले ही उनके पास से गुजर गये थे वे लोग अचानक से कहीं गायब हो चुके थे सड़क पर दूर दूर तक कोई नही दिखाई दे रहा थाआखिर कार सुशील ने डरते हुए डिक्की खोली डिक्की में सामान के अलावा कुछ भी नही था

सुशील धीरज लगता हैं तुम्हारा दिमाग खराब हो गया हैं कुछ भी तो नही यहाँ पर चलो जल्दी कार में बैठो

तीनों कार में बैठे और चल दिये कुछ देर बाद धीरज बोला

धीरज पापा मुझे बहुत तेज भूख लग रही हैं

सुमन सुशील तुम तो कह रहे थे कि यहाँ रोड पर बहुत सारे ढाबे मिलेंगे अब बताओ मुझे कहीं भी कोई ढाबा नही दिख रहा हैं मैं पहले ही कहा था कि हमें यहाँ नही आना चाहिये

कुछ देर चलते रहने के बाद सुशील को एक ढाबा दिखाई दिया

सुशील मैंने कहा था ना कि यहाँ ढाबा है चलो ढाबे के अन्दर चलते हैं और भर पेट खाना खाते हैं

तीनों जब ढाबे के अन्दर गये तो उन्हें ढाबे में तीन लोग दिखाई दिये दो अधेड़ उम्र के आदमी और औरत और एक जवान लड़की , लड़की के हाथ में दरांती थी वो धीरज के पास आकर बोली

लड़की- कहीये क्या खायेंगे

सुशीलजो भी ताजा हो वो ले आओ

लड़की जब पलट कर गई तो तीनों ने देखा की लड़की के बालों में दो कटे हुए हाथ लटके हुए हैं

धीरज, सुशील और सुमन का मुँह सुख गया सुमन ने सुशील के कान में कुछ कहा सुशील पानी का जग लेने के बहाने उस कमरे की तरफ गया जहाँ खाना बन रहा था। सुशील देखा की अधेड़ आदमी एक भगौने से दो-तीन कटे हुए हाथ निकाल कर कड़ाही में गर्म करने के लिये डाल रहा हैं । सुशील ने सुमन के पास आकर धीरे से कहा

सुशील यहाँ कुछ गड़बड़ तो जरुर हैं हमें यहाँ से निकल लेना चाहिये

तीनो चुपचाप दबे पाँव गेट की तरफ बढ़ने लगे लेकिन तभी वो दरांती वाली लड़की तेजी से चलती हुई आई  और उसने ढाबे का दरवाजा बंद कर दिया

लड़की- बिना खाना खाये मैं किसी को नही जाने देती

सुशील(घबराहट में)- आ आ अओ हमे लेट हो रहे हैं, हम लेट हो रहे हैं हमे जाने दो

लड़की (दरांती उठा के बोली)- चुपचाप बैठ जाओ और खाना खा कर जाओ

सुशील के परिवार के पास अब और कोई चारा नही था वे लोग टेबल के पास बैठ गये कुछ देर में एक आदमी शानदार खाना लेकर आया जिसमें पनीर की सब्जी रोटी आलू और भी कई चीजे थी आदमी जब खाना रख कर चला गया तो सुशील ने देखा की लड़की उनके पास अकेली खड़ी हैं सुशील ने एक झटके से लड़की के हाथ से दरांती छीना और उसकी गर्दन काट डाली भागो यहाँ से तीनों लोग ढाबे के बाहर भागे उधर कमरे से आदमी और औरत भयानक तरह से चिखते हुए उन तीनों के पीछे गये आदमी और औरत के चेहरे भयानक हो गये थे। सुशील का परिवार कार में बैठ गया और सुशील ने कार स्ट्राट कर दी लेकिन पीछे भूत और भूतनी ने उनकी कार पकड़ रखी थी सुशील ने बहुत कोशिक की लेकिन कार आगे ही नही बड़ पा रही थी आखिर कार उसने बैक गेयर डाला और कार तेजी से पीछे की ओर चला दी आदमी और औरत कार से बिल्कुल कुचल गये फिर सुशील ने तेजी से कार आगे बढ़ा दी और वो दिन होने तक नही रुका सुशील ने गाँव पहुँच कर सारी बात अपने भाई को बताई

सुशील का भाई- अच्छा हुआ तुम्हारे परिवार को कोई नुकसान नही पहुँचा कुछ साल पहले वहाँ एक ढाबा हुआ करता था जिसे एक गरीब परिवार चलाता था परिवार में तीन लोग थे आदमी औरत और उसकी लड़की एक बार कुछ जवान लड़के ढाबा में खाना खाने गये उन्होने लड़की के साथ बत्तमीजी करना शुरु कर दिया जब लड़की के पिता ने विरोध किया तो लड़को ने रिवालवर निकाली और आदमी औरत और उसकी लड़की को गोली मार दी उसी परिवार की आत्मा उस रोड पर भटकती हैं और वहाँ ढाबा होने का भ्रम पैदा करती हैं लौटते समय रात में वहाँ से मत गुजरना

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