Chudail Kachey Badam Wali | churel ki kahani | Chudail ki Kahani | chudail cartoon

Chudail Kachey Badam Wali | churel ki kahani | Chudail ki Kahani | chudail cartoon

दूर जंगल के बीच एक गांव था जहाँ पर एक चुड़ैल का साया था। जब जब उस गांव में रात में कोई भेड़िया रोता तो वह चुड़ैल के लिए एक संकेत होता के आज यहाँ पर एक बच्चे का जन्म हुआ है, आज वही भयानक रात थी।

 

माँ – कितने प्यारे जुड़वाँ बच्चे है।

पिता – एक दम मुझ पर गए है।

माँ – रहने दो, उसकी नाक देखो बिलकुल मेरे जैसी है।

तभी वहां पर चुड़ैल आती है और बच्चों को उठा लेती है। डर के मारे बच्चे रोने लग जाते है।

माँ – क क क आखिर मैं ही क्यों? कुछ देर तो देख लेने देती।

चुड़ैल (जोर जोर से हस्ते हुए) – क्यों अगर देर से आती तो भी कौन सा इन बच्चों की जान बच जाती हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ

यह सब पिता से नहीं देखा जाता और वह पास मे रखा डंडा उठता है और चुड़ैल को मारने की कोशिश करता है। चुड़ैल ऐसा करने से पहले ही उसको अपनी शक्ति से रस्सी मे बांध देती है और कहती है।

 

चुड़ैल – ना ना ना ना ना ऐसी गलती मत करना।

ऐसा बोलते ही वह आसमान की तरफ उड़ जाती है

 

चुड़ैल – हम्म्म आज आएगा असली मज़ा। काफी दिनों के बाद ये कोमल कोमल बच्चों को खाउंगी आहाहा मज़ा ही आ गया।

 

ऐसा कहते ही वह एक गुफा में चली जाती है। गुफा में और भी बच्चों की हड्डियाँ पड़ी होती है। चड़ैल पास में रखी एक प्लेट में दोनों बच्चों को लिटाती है और दोनों को बड़े मज़े से खाती है।

 

अब ऐसा काफी दिनों तक चलता रहता है।

जैसे ही किसी के घर बच्चों का जन्म होता। चुड़ैल उन बच्चों को उठा कर ले जाती और अपनी गुफा में जा कर उन मासूमो को खा जाती। गांव के लोग परेशान हो कर एक तांत्रिक के पास जाते है।

तांत्रिक – तुम अपने बच्चों के पैदा होने पर सारे दरवाज़े खिड़कियाँ बंद रखना। किसी को भी पता नहीं लगना चाहिए के किसी घर में बच्चे का जन्म हुआ है।

 

गांव के लोग ऐसा ही करते। जिस घर में किसी बच्चे का जन्म होता। वह एक महीने तक अपने घर के दरवाज़े खिड़की बंद रखता। ना आवाज़ बहार जाती। ना किसी को पता चलता।

 

चुड़ैल (करहाते हुए) – हम्म ये क्या हो गया है। हाय।  भूख के मारे बुरा हाल होता जा रहा है और गांव के लोग एक भी बच्चे को जन्म नहीं दे रहे। कुछ तो दाल में काला है।

 

एक घर का दरवाज़ा थोड़ा टूटा होता है। चुड़ैल घर में झांकना शुरू कर देती है। वह देखती है के घर के अंदर बच्चे बड़े हो रहे है।

 

चुड़ैल – हाय जब तक इनके रोने की आवाज़ नहीं सुन लेती। तब तक में इनको नहीं उठा सकती। अब क्या करू।

 

वह ऐसा सोचते हुए जंगल से गुज़र ही रही होती है के रास्ते में उसको एक बादाम बेचने वाली औरत मिल जाती है। चुड़ैल अचानक एक सूंदर स्त्री का रूप धारण कर लेती है।

चुड़ैल – ये क्या बेच रही हो?

बादाम वाली – कच्चा बादाम बेच रही हूँ दीदी

चुड़ैल – ये किस काम आते है।

बादाम वाली – बच्चों को ताकतवर बनाते है।

 

ऐसा सुनते ही चुड़ैल उस औरत को अपना असली रूप दिखा देती है। वह औरत डर के मारे भाग जाती है।

 

चुड़ैल (जोर जोर से हस्ते हुए ) – हाँ हाँ हाँ आई बड़ी बादाम बेचने वाली। बादाम तो अब मैं बेचूंगी। हाँ हाँ हाँ हाँ और वो भी कच्चा बादाम हाँ हाँ हाँ सोच सोच के मेरे मुँह पानी से भरा जा रहा है।

 

अगले दिन  चुड़ैल एक औरत के रूप मे आती है और उसके सर पर एक बादाम से भरा टोकरा रखा होता है।

 

चड़ैल (गाना गाते हुए) – Badam Badam A Dada Kacha Badam

Amar Kache Naiko Bubu Vaja Badam
Badam Badam A Dada Kacha Badam
Amar Kache Naiko Bubu Vaja Badam

 

 

एक आदमी – अरे ये क्या? कच्चा बादाम? ये किस काम का?

चुड़ैल – अरे ये तुम जैसों के लिए नहीं। ये तो अमीर लोगो के लिए होते है…. जिनको अपने बच्चे अपने जैसे अकल्मन्द और ताकतवर बनाने होते है। तुम तो किसी भी तरफ से अमीर नहीं लगते ना ही तुम्हारे बच्चे लगते हुह । और हाँ, अगर होते भी तो तुम्हारी औकात नहीं लग रही के तुम ये बादाम अपने बच्चों को खिला सको।

 

आदमी – ए पागल बादाम वाली। तुझे पता है तू किस से बात कर रही है?

चुड़ैल (हस्ते हुए ) – हाँ एक गरीब से

आदमी – बोल कितने के है ये बादाम और अपनी जुबान को लगाम दे।

चुड़ैल – पूरे एक सौ रुपये के है। ले सकते हो।

 

आदमी – ये ले पांच सौ रुपये और दफा हो यहाँ से।

चुड़ैल – अरे अरे आप तो बुरा मान गए साब जी। ये लो बादाम

आदमी – अब समझी कौन हूँ मैं? अब निकल यहाँ से ।

 

आदमी बादाम ले कर घर जाता है। और जैसे ही वह बादाम अपने बच्चों को देता है। बच्चों के पेट में जोर से दर्द होता है और बच्चे जोर जोर से रोने लगते।

तभी उनकी आवाज़ सुन कर चड़ैल वह पर आती है और बच्चों को उठा ले जाती है। अब ऐसा अक्सर होने लगा। चड़ैल बादाम बेचती। जैसे ही वह बादाम बच्चों के पेट में जाता। वह जोर जोर से रोते और बच्चों के रोने पर चुड़ैल उनको उठा कर ले जाती। 

 

गांव के लोग परेशान हो कर उसी तांत्रिक के पास जाते है। और कच्चे बादाम वाली बात भी बताते है।

तांत्रिक – हम्म लगता है इसका आखिरी वक़्त आ गया है। और हो न हो। ये कच्चे बादाम वाली ही चुड़ैल है।

 

तांत्रिक गांव वालों को एक तरकीब बताता है। और अगले दिन तरकीब के मुताबिक वही चुड़ैल उस गांव में आती है।

 

चड़ैल (गाना गाते हुए) – Badam Badam A Dada Kacha Badam

Amar Kache Naiko Bubu Vaja Badam
Badam Badam A Dada Kacha Badam
Amar Kache Naiko Bubu Vaja Badam

 

एक आदमी उस चुड़ैल के साथ मोल भाव करते हुए उसको गांव के बीच लगे हुए गोले में ले आता है। जैसे ही कच्चे बादाम वाली उस घेरे में आती है। वह अपने असली रूप में आ जाती है।

 

चुड़ैल (गुस्से से ) – अरे पागल तांत्रिक ये तू ठीक नहीं कर रहा।

तांत्रिक – अरे पागल तो तू है। जो मासूम बच्चों को उठा कर ले जाती है। चल अब तेरा आखिरी वक़्त आ गया है।

 

ऐसा कहते ही तांत्रिक एक मंत्र पड़ता है।

तांत्रिक – ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे नमः ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे नमः

 

जैसे ही मंत्रो का जाप होता है। वह गोला आग में बदल जाता है और चुड़ैल का अंत हो जाता है।

 

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